हैदराबाद, जिसे भारत का आईटी हब और “सिटी ऑफ़ पर्ल्स” कहा जाता है, तेजी से शहरीकरण और विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है। लेकिन इसी बीच शहर की बिजली व्यवस्था और सड़क पर बेतरतीब तरीके से फैले बिजली के तार लंबे समय से नागरिकों के लिए परेशानी और खतरे का सबब बने हुए हैं।
- 🌆 क्यों ज़रूरी है अंडरग्राउंड पावर केबल सिस्टम?
- 1. सुरक्षा की दृष्टि से
- 2. शहर की सुंदरता और ट्रैफ़िक प्रबंधन
- 3. टेक्नोलॉजी और स्थिरता
- 4. प्राकृतिक आपदाओं से सुरक्षा
- 📜 मल्लू भट्टी विक्रमार्क के निर्देश
- 🏗️ प्रोजेक्ट का दायरा और लागत
- 🚦 नागरिकों के लिए लाभ
- 🌍 वैश्विक संदर्भ
- 📊 आर्थिक और सामाजिक प्रभाव
- ⚠️ चुनौतियाँ
- 🏛️ सरकार की रणनीति
- 👨👩👧 नागरिकों की राय
इन्हीं चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए तेलंगाना के डिप्टी सीएम मल्लू भट्टी विक्रमार्क ने आदेश दिया है कि हैदराबाद में अंडरग्राउंड पावर केबल प्रोजेक्ट (Underground Power Cable Project) को युद्धस्तर पर तेज़ किया जाए और जल्द से जल्द बिजली खंभों से खुले तारों को हटाया जाए।
यह निर्णय न केवल शहर की सुरक्षा और सौंदर्यीकरण के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह हैदराबाद को एक स्मार्ट और आधुनिक महानगर बनाने की दिशा में भी बड़ा कदम है।
🌆 क्यों ज़रूरी है अंडरग्राउंड पावर केबल सिस्टम?
1. सुरक्षा की दृष्टि से
बिजली के खंभों पर लटके तार अक्सर बारिश या तूफ़ान के दौरान टूट जाते हैं।
इससे करंट लगने, दुर्घटना और आग लगने जैसी घटनाएँ होती हैं।
भूमिगत केबल सिस्टम इन खतरों को काफी हद तक कम कर देगा।
2. शहर की सुंदरता और ट्रैफ़िक प्रबंधन
खुले तार और खंभे सड़कों और फुटपाथों को अवरुद्ध करते हैं।
अंडरग्राउंड केबल से सड़कें अधिक साफ़ और व्यवस्थित दिखेंगी।
3. टेक्नोलॉजी और स्थिरता
भूमिगत केबलिंग से बिजली आपूर्ति निरंतर और बिना बाधा के संभव होगी।
खासकर IT कंपनियों और इंडस्ट्रियल ज़ोन के लिए यह बेहद फायदेमंद है।
4. प्राकृतिक आपदाओं से सुरक्षा
आंधी, तूफ़ान और बारिश में बिजली के खंभे और तार अक्सर नुकसान पहुंचाते हैं।
भूमिगत केबल इस समस्या को पूरी तरह दूर कर सकते हैं।
📜 मल्लू भट्टी विक्रमार्क के निर्देश
तेलंगाना सरकार ने साफ कहा है कि:
अंडरग्राउंड केबलिंग कार्यों को तेज़ किया जाए।
इलेक्ट्रिक पोल्स पर लटके तारों को हटाने का काम युद्धस्तर पर हो।
नागरिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।
भट्टी ने अधिकारियों को चेतावनी दी कि देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी और काम में तेजी लाने के लिए अतिरिक्त संसाधन लगाए जाएँ।
🏗️ प्रोजेक्ट का दायरा और लागत
हैदराबाद मेट्रोपॉलिटन एरिया में चरणबद्ध तरीके से सभी पावर लाइनों को अंडरग्राउंड किया जाएगा।
अनुमानित लागत हज़ारों करोड़ रुपये है।
सबसे पहले भीड़भाड़ वाले और संवेदनशील इलाकों में काम किया जाएगा।
🚦 नागरिकों के लिए लाभ
✅ बेहतर बिजली आपूर्ति
ट्रिपिंग और आउटेज की समस्या घटेगी।
नागरिकों को 24×7 स्थिर बिजली मिलेगी।
✅ सड़क सुरक्षा में सुधार
सड़क पर तार गिरने से होने वाले हादसों का खतरा ख़त्म होगा।
✅ सौंदर्यीकरण
हैदराबाद की सड़कों का लुक बदलेगा और यह अधिक आधुनिक दिखाई देगा।
✅ आईटी सेक्टर को लाभ
IT Corridors जैसे गाचीबोवली, हाईटेक सिटी में बिजली कटौती की समस्या समाप्त होगी।
🌍 वैश्विक संदर्भ
कई विकसित देशों जैसे सिंगापुर, दुबई और टोक्यो में अंडरग्राउंड पावर सिस्टम पहले से ही सफलतापूर्वक लागू है।
हैदराबाद भी अब उसी दिशा में आगे बढ़ रहा है।
📊 आर्थिक और सामाजिक प्रभाव
रोज़गार सृजन – इस प्रोजेक्ट से हज़ारों लोगों को रोज़गार मिलेगा।
निवेश आकर्षण – शहर का इंफ्रास्ट्रक्चर सुधरने से विदेशी निवेशक आकर्षित होंगे।
लंबी अवधि की बचत – बार-बार मरम्मत की ज़रूरत कम होगी और बिजली वितरण लागत घटेगी।
जीवन की गुणवत्ता – नागरिकों को बेहतर और सुरक्षित जीवन वातावरण मिलेगा।
⚠️ चुनौतियाँ
हालाँकि यह प्रोजेक्ट महत्वाकांक्षी है, लेकिन इसमें कुछ चुनौतियाँ भी हैं:
भारी लागत
सड़क खोदाई से ट्रैफ़िक समस्या
प्रोजेक्ट में समय की देरी
विभिन्न विभागों के बीच समन्वय की कमी
भट्टी विक्रमार्क ने स्पष्ट किया है कि इन चुनौतियों को पार करने के लिए सरकार स्पेशल टास्क फोर्स गठित करेगी।
🏛️ सरकार की रणनीति
फेज़-वाइज इंप्लीमेंटेशन
पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल
स्मार्ट ग्रिड टेक्नोलॉजी का उपयोग
रीयल-टाइम मॉनिटरिंग सिस्टम
👨👩👧 नागरिकों की राय
कई नागरिकों का मानना है कि यह योजना काफी पहले शुरू हो जानी चाहिए थी।
“हर बारिश में हमें डर लगता है कि कहीं तार टूटकर गिर न जाए। अब अंडरग्राउंड केबलिंग से यह समस्या खत्म होगी।”
“आईटी कंपनियों को बिना रुकावट बिजली मिलेगी तो रोजगार और निवेश और बढ़ेगा।”
❓ FAQs – अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
Q1. हैदराबाद में अंडरग्राउंड पावर केबल प्रोजेक्ट कब तक पूरा होगा?
👉 सरकार ने चरणबद्ध योजना बनाई है, जिसमें अगले 3–5 साल में पूरे शहर को कवर करने का लक्ष्य है।
Q2. क्या इस प्रोजेक्ट से ट्रैफ़िक पर असर पड़ेगा?
👉 हाँ, सड़क खोदाई के दौरान दिक्कतें होंगी लेकिन इसे नियंत्रित तरीके से किया जाएगा।
Q3. क्या अंडरग्राउंड केबल सिस्टम महँगा है?
👉 शुरुआती लागत अधिक है, लेकिन लंबे समय में यह किफायती और सुरक्षित साबित होता है।
Q4. इससे आम नागरिकों को क्या लाभ होगा?
👉 सुरक्षित, स्थिर और निर्बाध बिजली आपूर्ति, साथ ही शहर की सुंदरता में सुधार।
Q5. क्या यह योजना केवल आईटी सेक्टर के लिए है?
👉 नहीं, यह पूरे शहर के लिए है। हालांकि आईटी हब को प्राथमिकता दी जाएगी।
📌 निष्कर्ष
हैदराबाद अंडरग्राउंड पावर केबल प्रोजेक्ट न केवल एक इंफ्रास्ट्रक्चर सुधार है, बल्कि यह शहर की सुरक्षा, सुंदरता और विकास के लिए एक मील का पत्थर साबित होगा।
मल्लू भट्टी विक्रमार्क द्वारा दिए गए निर्देश इस बात का प्रतीक हैं कि सरकार अब देरी बर्दाश्त नहीं करेगी और इस प्रोजेक्ट को जल्द से जल्द पूरा करने के लिए हर संभव कदम उठाएगी।
यह कदम हैदराबाद को एक स्मार्ट, सुरक्षित और ग्लोबल लेवल का शहर बनाने की दिशा में ऐतिहासिक साबित हो सकता है।