तेलंगाना के उपमुख्यमंत्री का निर्देश: संसाधनों का सतर्क उपयोग करें, प्राथमिकता वाले कार्य पहले पूरे करें

TARESH SINGH
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कम संसाधनों में बड़ी जीत का फॉर्मूला

सरकारी योजनाएँ तभी असर दिखाती हैं जब पैसा, लोग और समय—तीनों का सही इस्तेमाल हो। तेलंगाना के उपमुख्यमंत्री मल्लु भट्टी विक्रमarka ने हालिया बैठकों में यही बात दोहराई: “डिपार्टमेंटल खर्च को तर्कसंगत बनाइए, प्राथमिकता के आधार पर खर्च कीजिए और राजस्व बढ़ाइए—खासकर गैर-कर (Non-Tax) राजस्व।” यह सिर्फ नीतिगत बयान नहीं, बल्कि प्रशासन के लिए एक वर्किंग मैन्युअल है, जो बताता है कि सीमित संसाधनों में भी किस तरह राज्य तेज़ी से डिलीवर कर सकता है। The New Indian Express


संदर्भ: क्यों ज़रूरी है “प्राथमिकता-आधारित” खर्च?

  • आर्थिक व राजकोषीय यथार्थ: किसी भी राज्य की आय सीमित और ज़रूरतें अनगिनत। ऐसे में हर रुपया वहीं लगना चाहिए जहाँ सबसे ज़्यादा सार्वजनिक लाभ हो।

  • विरासत में लंबित परियोजनाएँ: नई सरकारों को अक्सर पिछली सरकार के बकाया और अधूरे कामों का बोझ उठाना पड़ता है, इसलिए कड़ा प्राथमिकता क्रम तय करना अनिवार्य है।

  • राज्य-स्तरीय विकास लक्ष्य: सड़क, सिंचाई, स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार—हर क्षेत्र में लक्ष्यों को पाने के लिए रिसोर्स एलोकेशन का विज्ञान समझना पड़ता है।

  • निजी भागीदारी और भरोसा: समय पर भुगतान, स्पष्ट टेंडरिंग और पारदर्शी मॉनिटरिंग से ठेकेदार व निवेशक भरोसा करते हैं—और यही विकास का ईंधन बनता है। The Times of India


उपमुख्यमंत्री के मुख्य निर्देश: “रिसोर्सेज को स्ट्रैटेजिकली लगाइए”

1) खर्च का तर्कसंगठन (Rationalisation)

उपराष्ट्र… नहीं, उपमुख्यमंत्री ने साफ़ कहा—“डिपार्टमेंट का खर्च प्राथमिकता के हिसाब से मैनेज कीजिए।” यानी जिन कामों का सामाजिक-आर्थिक रिटर्न ज़्यादा है, उन्हें पहले फंडिंग मिले। साथ ही, बजट आवंटन में विभागों के बीच अनुचित असमानता कम की जाए ताकि संतुलित विकास हो सके। The New Indian Express

2) नॉन-टैक्स रेवेन्यू पर फोकस

कर बढ़ाए बिना राजस्व बढ़ाने के लिए भूमि, खनिज, उपयोगकर्ता शुल्क, संपत्ति/सेवा शुल्क जैसे स्रोतों को प्रोफ़ेशनल ढंग से बढ़ाने की बात हुई—यही टिकाऊ रास्ता है। उपमुख्यमंत्री ने गैर-कर राजस्व को बढ़ाने पर ज़ोर दिया और केंद्रीय निधियों की टैपिंग के लिए भी सक्रिय प्रयास करने को कहा। The New Indian Express

3) नियमित रिव्यू और फॉलो-अप

Resource Mobilisation Sub-Committee की साप्ताहिक बैठकें तय हुईं। निर्णयों की आइटम-वाइज़ प्रोग्रेस अगले हफ़्ते रिव्यू की जाएगी। फाइनेंस विभाग में स्पेशल ऑफ़िसर नियुक्त करने के निर्देश भी दिए गए, जो राजस्व बढ़ोत्तरी से जुड़े मुद्दों की निरंतर निगरानी करेंगे। The New Indian Express

4) LRS, सैंड माइनिंग और पॉल्यूशन कंट्रोल

राजस्व बढ़ाने के लिए Layout Regularisation Scheme (LRS) के अनुमोदन तेज़ करने, एजेंसी क्षेत्रों में आदिवासी समुदाय को सीधे रेत खनन संचालित कराने तथा प्रदूषणकारी उद्योगों को हैदराबाद ORR के बाहर स्थानांतरित कराने जैसे कदमों पर भी जोर दिया गया—ताकि राजस्व बढ़े और पर्यावरणीय संतुलन भी सुरक्षित रहे। The Times of India

5) इन्फ्रास्ट्रक्चर पर स्मार्ट कैपेक्स — HAM मॉडल

राज्य ने सड़कों के लिए ₹12,000 करोड़ की बड़ी योजना पर काम तेज़ किया है, जिसमें Hybrid Annuity Model (HAM) अपनाया गया है—सरकार 40% देगी और शेष 60% परफ़ॉरमेंस-लिंक्ड एन्‍युइटी से। कम फिस्कल स्पेस में भी बड़े काम संभव हों, यही स्मार्ट फाइनेंसिंग है। The Times of India


“प्राथमिकता” सेट करने का व्यावहारिक ढाँचा: 7-स्टेप मैट्रिक्स

नीचे दिया गया 7-स्टेप Prioritisation Matrix किसी भी विभाग/ज़िला प्रशासन के लिए तुरंत लागू करने योग्य है:

  1. आउटकम-लिंक्ड फ़िल्टर: परियोजना से सीधे कितने लोगों पर असर? गरीबी, रोज़गार, स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़क पहुँच—जितना व्यापक असर, उतनी प्राथमिकता।

  2. रेडिनेस इंडेक्स: DPR, भूमि, क्लीयरेंस, टेंडर—जो परियोजनाएँ तैयार हैं, उन्हें पहले।

  3. Cost-to-Impact रेशियो: प्रति करोड़ में सामाजिक असर—कम लागत में उच्च प्रभाव वाली योजनाएँ फास्ट-ट्रैक।

  4. Revenue Potential: जिन योजनाओं से शुल्क/फ़ीस/सेवाएँ बढ़ें, उन्हें Non-Tax Revenue Booster मानकर आगे बढ़ाएँ। The New Indian Express

  5. Maintenance Burden: O&M लागत कम रखने वाली, टिकाऊ परियोजनाएँ प्राथमिक।

  6. Risk & Resilience: बाढ़/सूखा/मौसम जोखिम में रेसिलिएंट डिज़ाइन—लंबी उम्र और कम नुकसान।

  7. Equity Lens: पिछड़े/दूरदराज़ इलाकों में बुनियादी सेवाएँ—Balanced Growth का केंद्र। The New Indian Express


विभाग-वार फोकस: कहाँ क्या करना है?

A) राजस्व व वित्त

  • Revenue Diversification: रजिस्ट्रेशन, स्टाम्प ड्यूटी में प्रॉसेस इफिशिएंसी; यूज़र चार्जेज़ का तार्किक संरेखण; एसेट मोनेटाइज़ेशन

  • डिजिटल कलेक्शन: लीक-प्रूफ बिलिंग, रियल-टाइम डैशबोर्ड

  • ग्रांट-ट्रैकिंग: केंद्र/बाह्य सहायता के लिए डेडलाइन-ड्रिवन प्रस्ताव। The New Indian Express

B) नगर विकास व आवास

  • LRS फास्ट-ट्रैक: समयबद्ध अनुमोदन; एकल-खिड़की (Single-Window) सिस्टम।

  • मूल्यांकन एवं पारदर्शिता: बेसिक लैंड वैल्यू रिव्यू; ऑनलाइन ट्रैकिंग; भ्रष्टाचार-रोधी कंट्रोल। The Times of India

C) खनन व पर्यावरण

  • सैंड-माइनिंग का सामुदायिक मॉडल: आदिवासी समुदायों को डायरेक्ट ऑपरेशन; मध्यस्थता घटेगी, लीकेज रुकेगा।

  • पॉल्यूटिंग यूनिट्स का रिलोकेशन: ORR के बाहर ग्रीन ज़ोनिंग; EIA कम्प्लायंस सख़्त। The Times of India

D) सड़क व ग्रामीण संपर्क

  • HAM के ज़रिए स्मार्ट कैपेक्स: 40% सरकारी, 60% परफ़ॉर्मेंस-लिंक्ड—कम जोखिम, बेहतर रख-रखाव

  • टेंडरिंग का कैलेंडर: चरणबद्ध e-tenders; छोटे कॉन्ट्रैक्टर्स के लिए भी अवसर। The Times of India


10-दिनी एक्शन प्लान: टीमों के लिए काम-काज की चेकलिस्ट

उपमुख्यमंत्री के निर्देशों के अनुरूप, विभागों को 10 दिनों में रैशनलाइज़ेशन प्लान और प्राथमिकता सूची जमा करनी है। नीचे प्रैक्टिकल चेकलिस्ट दी है, जिसे विभाग अपने सर्कुलर में कॉपी-पेस्ट कर सकते हैं: The New Indian Express

  1. Top-20 प्राथमिक कार्य: हर विभाग अपने 20 शीर्ष कार्य चिन्हित करे—आउटकम, लागत, समयसीमा, रिस्क, राजस्व प्रभाव के साथ।

  2. बजट मैचिंग: उपलब्ध फंड vs. प्राथमिक कार्यों की मांग—Funding Gap को चिन्हित कर Chief Secretary/Finance को भेजें।

  3. Quick Wins: 90 दिनों में पूरे होने वाले काम अलग सूची में; इन्हें मीडिया/जन भागीदारी के साथ तेज़ी से पूरा करें।

  4. हार्डल-रिमूवल: LRS, NOCs, जमीन, क्लीयरेंस—जो भी बाधा हो, Single-Window Escalation में डालें। The Times of India

  5. मासिक/साप्ताहिक रिव्यू: KPI तय—टेंडर-टू-वर्क-ऑर्डर समय, भुगतान चक्र, भौतिक प्रगति, फोटो-जिओ टैगिंग।

  6. भुगतान अनुशासन: वर्क-माइलस्टोन के अनुसार समय पर भुगतान—कॉन्ट्रैक्टर कॉन्फिडेंस बढ़ेगा। The Times of India

  7. जन फीडबैक लूप: पंचायत/वार्ड स्तर पर शिकायत समाधान डेस्क; WhatsApp/IVR से रियल-टाइम फीडबैक।


केस-इन-पॉइंट: सड़क विकास—कम पूँजी, बड़ा आउटपुट

HAM मॉडल के इस्तेमाल से सड़कों पर तेज़ निवेश संभव हो रहा है। सरकार पूँजी का 40% चरणों में देती है; शेष निवेशक लगाते हैं और परफ़ॉर्मेंस-लिंक्ड एन्‍युइटी से वापसी पाते हैं। ये व्यवस्थाएँ दीर्घकालिक रखरखाव को भी अनुबंध का हिस्सा बनाती हैं—जिससे सड़कें ज्यादा टिकाऊ और गड्ढा-रहित बन पाती हैं। यह ठीक वैसा ही है जैसा उपमुख्यमंत्री का कहना है: “यथार्थवादी खर्च, प्राथमिकता-आधारित परियोजनाएँ और समय पर भुगतान।” The Times of IndiaThe New Indian Express


LRS और सैंड-माइनिंग: राजस्व, नियमन और न्याय का संतुलन

  • LRS के तेज़ अनुमोदन से नकदी प्रवाह बढ़ता है, अनियमित कॉलोनियों का औपचारिककरण होता है और नागरिकों को स्वामित्व सुरक्षा मिलती है।

  • सैंड-माइनिंग में समुदाय की भागीदारी—आदिवासी क्षेत्रों में डायरेक्ट ऑपरेशन का मतलब है मध्यस्थों की कटौती, अधिक पारदर्शिता और स्थानीय रोज़गार

  • प्रदूषणकारी इकाइयों का स्थानांतरण—शहरवासी स्वच्छ हवा, और उद्योग को स्पष्ट नियमदीर्घकालिक लाइसेंस सुरक्षाThe Times of India


सुशासन के 6 स्तंभ: जिससे “निर्देश” ज़मीनी हकीकत बनते हैं

  1. डाटा-ड्रिवन डिसीज़न: सभी विभागों के KPI—डैशबोर्ड पर सार्वजनिक करें।

  2. कॉन्ट्रैक्ट मैनेजमेंट: स्टैंडर्ड बिड डॉक्यूमेंट, डिस्प्यूट-रिज़ॉल्यूशन की निश्चित समयसीमा।

  3. पब्लिक कम्युनिकेशन: तिमाही प्रगति रिपोर्ट—लोकभाषा में, इन्फोग्राफिक के साथ।

  4. इंटीग्रिटी/ऑडिट: प्री-आडिट चेकलिस्ट और पोस्ट-इम्पैक्ट इवैल्यूएशन।

  5. इंटर-डिपार्टमेंट कोऑर्डिनेशन: फाइनेंस, R&B, पंचायत राज, महापौर/कलक्टर—एक साझा वॉर-रूम। The New Indian Express+1

  6. कर्मचारी क्षमता-निर्माण: प्रोजेक्ट मैनेजमेंट, ई-प्रोक्योरमेंट, ESG अनुपालन पर छोटे-छोटे मॉड्यूल। The New Indian Express


संभावित लाभ: नागरिकों, उद्योग और सरकार—तीनों के लिए जीत

  • तेज़ डिलीवरी: प्राथमिकता वाले कार्यों में लीड टाइम कम

  • बेहतर सेवाएँ: सड़क, पानी, स्वास्थ्य जैसी कोर सेवाओं का उन्नयन।

  • राजस्व का विविधीकरण: कर पर अत्यधिक निर्भरता घटेगी; नॉन-टैक्स स्रोत मज़बूत होंगे। The New Indian Express

  • निवेशक भरोसा: समय पर भुगतान और पारदर्शी टेंडर—Capital Crowding-InThe Times of India

  • पर्यावरणीय सुधार: प्रदूषणकारी इकाइयों का रिलोकेशन, टिकाऊ इंफ्रास्ट्रक्चर। The Times of India


चुनौतियाँ: जिन पर नज़र रखना ज़रूरी

  • इंटर-डिपार्टमेंटल समन्वय: निर्णय तेज़ हैं, अमल उतना ही तेज़ होना चाहिए।

  • डेटा क्वालिटी: KPI सटीक न हुए तो गलत प्राथमिकताएँ बनेंगी।

  • फिस्कल डिसिप्लिन: नई/पुरानी देनदारियों के बीच कैश-फ्लो मैनेजमेंट

  • सामुदायिक प्रतिरोध: रिलोकेशन/रेकग्युलराइज़ेशन में लोक संवाद और समुचित पुनर्वास अनिवार्य। The Times of India


मैदान से आवाज़: “पहले हमारी सड़क, फिर बाकी सब”

वारंगल के पास के एक गाँव में हैल्थ वर्कर कहती हैं, “अगर ग्रामीण सड़क दुरुस्त हो, तो एम्बुलेंस समय पर आती है—बच्चों की वैक्सीनेशन से लेकर बुज़ुर्गों की जांच तक सब आसान हो जाता है।” यही प्राथमिकता-आधारित खर्च का मानवीय चेहरा है—आंकड़े नहीं, जीवन बदलते हैं। (इंडिकेटिव, मानव-केंद्रित टोन)


आगे की राह: “कम संसाधन—उच्च प्रभाव” का तेलंगाना मॉडल

तेलंगाना सरकार का ज़ोर रियलिस्टिक खर्च और हाई-इम्पैक्ट प्रोजेक्ट्स पर है। HAM जैसे मॉडल, LRS फास्ट-ट्रैक, सामुदायिक सैंड-माइनिंग, और विभाग-वार रैशनलाइज़ेशन से एक इंटीग्रेटेड गुड गवर्नेंस फ्रेमवर्क बनता है। अगर साप्ताहिक रिव्यू, स्पेशल ऑफिसर मॉनिटरिंग और 10-दिनी प्लान समय पर लागू हुए, तो यह मॉडल अन्य राज्यों के लिए भी टेम्पलेट बन सकता है। The New Indian Express+1The Times of India


FAQs — अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

Q1. “प्राथमिकता के आधार पर खर्च” का मतलब क्या है?
A. सीमित बजट में उन परियोजनाओं को पहले फंडिंग जिनसे अधिकतम सामाजिक-आर्थिक असर हो—जैसे ग्रामीण कनेक्टिविटी, स्वास्थ्य बुनियादी ढाँचा, पेयजल, स्कूल अपग्रेड।

Q2. गैर-कर (Non-Tax) राजस्व किन-किन स्रोतों से बढ़ाया जा सकता है?
A. उपयोगकर्ता शुल्क, सेवाओं के शुल्क, भूमि/संपत्ति से आय, खनिज/लोन लाइसेंस फीस, LRS जैसे नियमितीकरण शुल्क, एसेट मोनेटाइज़ेशन—परंतु पारदर्शिता और निष्पक्षता ज़रूरी। The New Indian ExpressThe Times of India

Q3. HAM मॉडल राज्य के लिए क्यों फायदेमंद है?
A. सरकार पर एकमुश्त पूँजी बोझ कम; 15 साल तक मेंटेनेंस बन्धन; परफ़ॉर्मेंस-लिंक्ड भुगतान; रोड क्वालिटी बेहतर। The Times of India

Q4. LRS को तेज़ करने से आम नागरिक को क्या लाभ?
A. संपत्ति का कानूनी सुरक्षा कवच; ऋण/सेवा तक पहुँच; नगर राजस्व में वृद्धि; अनियमितता घटेगी—यानी दोनों पक्षों को फायदा। The Times of India

Q5. साप्ताहिक रिव्यू/स्पेशल ऑफिसर का क्या रोल है?
A. फैसलों की घड़ी-घड़ी पर प्रगति जाँच, विभागों के बीच बॉटल-नेक हटाना और राजस्व-वृद्धि पहलों की निरंतर निगरानीThe New Indian Express


निष्कर्ष: “फोकस + अनुशासन = डिलीवरी”

तेलंगाना के उपमुख्यमंत्री का संदेश सरल है—रिसोर्सेज़ का सावधानीपूर्वक उपयोग, खर्च का तर्कसंगठन, और प्राथमिकता वाले कार्य पहले। अगर यही गति और सख्ती कायम रही, तो तेलंगाना कम संसाधन—उच्च प्रभाव शासन का उदाहरण बन सकता है। LRS से लेकर HAM रोड्स, और नॉन-टैक्स रेवेन्यू से साप्ताहिक रिव्यू तक—यह पूरा पैकेज People-Centric Delivery की राह खोलता है। The New Indian ExpressThe Times of India+1

 


संदर्भ/आधार (Key Sources)

  • साप्ताहिक रिव्यू, स्पेशल ऑफ़िसर और रिसोर्स मोबिलाइज़ेशन निर्देश। The New Indian Express

  • नॉन-टैक्स रेवेन्यू, विभागीय रैशनलाइज़ेशन, 10-दिनी प्लान और समान बजट वितरण का ज़ोर। The New Indian Express

  • LRS स्पीड-अप, सैंड-माइनिंग में सामुदायिक भागीदारी, प्रदूषणकारी उद्योगों का रिलोकेशन। The Times of India

  • ₹12,000 करोड़ सड़क योजना और HAM मॉडल—कम संसाधन में अधिक असर की रणनीति। The Times of India

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