विशाखापट्टनम में NSTL का 56वां रेज़िंग डे: एक समर्पण और नवाचार का उत्सव

TARESH SINGH
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विशाखापट्टनम स्थित नौसेना विज्ञान और प्रौद्योगिकी प्रयोगशाला (NSTL) ने 20 अगस्त 2025 को अपने 56वें रेज़िंग डे का आयोजन किया। यह आयोजन भारतीय रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) के तहत कार्यरत इस प्रमुख प्रयोगशाला की वैज्ञानिक उपलब्धियों, नवाचारों और राष्ट्र निर्माण में योगदान को सम्मानित करने का एक महत्वपूर्ण अवसर था।


NSTL का इतिहास और विकास

NSTL की स्थापना 20 अगस्त 1969 को हुई थी, जिसका उद्देश्य भारतीय नौसेना के लिए स्वदेशी जलमग्न हथियारों और प्रणालियों का विकास करना था। शुरुआत में केवल 10 कर्मचारियों के साथ कार्य शुरू करने वाली इस प्रयोगशाला में आज लगभग 612 सदस्य कार्यरत हैं, जिनमें 172 वैज्ञानिक शामिल हैं। NSTL ने अपनी स्थापना के बाद से कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं पर कार्य किया है, जिनमें टॉरपीडो, माइन, डेकोय, टारगेट, सिमुलेटर, फायर कंट्रोल सिस्टम और वॉरशिप टेक्नोलॉजी शामिल हैं।The Hans India


56वें रेज़िंग डे का आयोजन

इस वर्ष के रेज़िंग डे के मुख्य अतिथि के रूप में DRDO के निदेशक जनरल (नौसेना प्रणालियाँ और सामग्री) डॉ. Y. श्रीनिवास राव उपस्थित थे। उन्होंने NSTL की उपलब्धियों की सराहना करते हुए कहा कि NSTL न केवल भारतीय नौसेना, बल्कि पूरे राष्ट्र की उम्मीदों का केंद्र बन चुका है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि NSTL की उत्पादों की सूची में शामिल होने से इसकी जिम्मेदारी और बढ़ गई है।

डॉ. श्रीनिवास राव ने NSTL की अत्याधुनिक हाइड्रोडायनामिक अनुसंधान सुविधाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि इस प्रयोगशाला के पास पनडुब्बी डिजाइन करने की क्षमता है। उन्होंने यह भी कहा कि NSTL के विकास के साथ, विशाखापट्टनम जलमग्न हथियारों के उत्पादन का प्रमुख केंद्र बन सकता है।


NSTL की प्रमुख परियोजनाएँ

NSTL ने कई स्वदेशी परियोजनाओं पर कार्य किया है, जिनमें प्रमुख हैं:

  1. वरुणास्त्र (Varunastra): यह एक हल्की वजन वाली टॉरपीडो है जिसे जलमग्न प्लेटफार्मों के खिलाफ उपयोग के लिए डिजाइन किया गया है।

  2. मिगम (MIGM): यह एक बहु-प्रभावक ग्राउंड माइन है जिसे भारतीय नौसेना के लिए NSTL ने विकसित किया है।

  3. HEAUV (High Endurance Autonomous Underwater Vehicle): यह एक स्वायत्त जलमग्न वाहन है जिसे NSTL और कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (CSL) के सहयोग से विकसित किया जा रहा है।

इन परियोजनाओं के माध्यम से NSTL ने भारतीय नौसेना की स्वदेशी क्षमता को बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।


कर्मचारियों और कर्मचारियों के योगदान को सम्मानित करना

रेज़िंग डे के अवसर पर NSTL ने उन कर्मचारियों को सम्मानित किया जिन्होंने 25 वर्षों से अधिक समय तक सेवा की है। यह सम्मान उनके समर्पण और कड़ी मेहनत को मान्यता देने का एक तरीका था।


NSTL का भविष्य और चुनौतियाँ

NSTL का लक्ष्य भविष्य में और भी स्वदेशी प्रणालियों का विकास करना है, ताकि भारतीय नौसेना की आत्मनिर्भरता को और बढ़ाया जा सके। इसके लिए NSTL को नई तकनीकों, अनुसंधान और विकास में निरंतर नवाचार की आवश्यकता है।


निष्कर्ष

NSTL का 56वां रेज़िंग डे न केवल एक उत्सव था, बल्कि यह भारतीय रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी नवाचार और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम था। इस आयोजन ने NSTL के कर्मचारियों के समर्पण और कड़ी मेहनत को सम्मानित किया और भविष्य में और भी बड़ी उपलब्धियों की ओर अग्रसर होने की प्रेरणा दी।

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